आज के समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुका है। बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग ने पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में वृक्षारोपण ही इसका सबसे सशक्त समाधान है।
हम सभी को अपने जीवन के खास मौकों को प्रकृति के नाम करना चाहिए। चाहे वह जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह, माता-पिता के विशेष दिन या किसी प्रियजन की स्मृति—हर अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाएं।
ग्वालियर के उदयपुर मुरार में विकसित नीम-शीशम का मानव निर्मित जंगल इस सोच का जीवंत उदाहरण है। करीब 20 हजार पेड़ों से सजा यह स्थल न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है।
लेखक, जिन्होंने 35 वर्षों तक Border Security Force, Special Protection Group और Commonwealth Games 2010 में अपनी सेवाएं दीं, अब पर्यावरण संरक्षण को अपना मिशन बना चुके हैं।
उनका मानना है कि असली सुकून शहरों की भागदौड़ में नहीं, बल्कि गांव की हरियाली और पेड़ों की छांव में मिलता है। वे सभी सेवानिवृत्त साथियों से अपील करते हैं कि वे अपने गांव लौटकर इस हरित क्रांति का हिस्सा बनें।
वृक्षारोपण के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे इस अभियान से जुड़ना और भी आसान हो गया है।
आइए, मिलकर एक हरित भविष्य का निर्माण करें।
