नई दिल्ली: हर्बल सिगरेट को लंबे समय से “प्राकृतिक” और “सुरक्षित” विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। लेकिन एक नई स्टडी ने इस धारणा को पूरी तरह चुनौती दे दी है। शोध के अनुसार, हर्बल सिगरेट का धुआं सामान्य तंबाकू सिगरेट जितना ही नहीं, बल्कि कई मामलों में उससे अधिक खतरनाक हो सकता है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Journal of Hazardous Materials में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारतीय बाजार में उपलब्ध हर्बल और तंबाकू सिगरेट के धुएं के भौतिक, रासायनिक और ऑक्सीडेटिव गुणों की तुलना की गई।
क्या कहती है स्टडी?
आईआईटी गांधीनगर के शोधकर्ताओं के मुताबिक, “तंबाकू-फ्री” का मतलब “रिस्क-फ्री” नहीं होता। अध्ययन में पाया गया कि हर्बल सिगरेट से निकलने वाले कण और गैसें तंबाकू सिगरेट के बराबर या उससे अधिक हानिकारक हो सकती हैं।
शोध में दो प्रमुख तंबाकू ब्रांड और चार हर्बल सिगरेट किस्मों का विश्लेषण किया गया, जिनमें तुलसी, लौंग, दालचीनी, पुदीना, ग्रीन टी और कैमोमाइल जैसे तत्व शामिल थे।
पत्तों में लिपटी हर्बल सिगरेट सबसे खतरनाक
स्टडी के अनुसार, तेंदू पत्ते में लिपटी हर्बल सिगरेट सबसे ज्यादा हानिकारक पाई गईं। इनसे निकलने वाले धुएं में ऑक्सीडेटिव क्षमता अधिक पाई गई, जो शरीर में हानिकारक रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) पैदा करती है।
20% ज्यादा खतरनाक महीन कण
हर्बल सिगरेट के धुएं में 500 नैनोमीटर से छोटे कणों की मात्रा तंबाकू सिगरेट की तुलना में लगभग 20% अधिक पाई गई। ये कण सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे दिल और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सीसा (Lead) की अधिक मात्रा भी मिली
एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि कुछ हर्बल सिगरेट में सीसा (Lead) की मात्रा अधिक पाई गई, जबकि इन्हें “100% नेचुरल” और “केमिकल-फ्री” बताकर बेचा जाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
शोधकर्ताओं का कहना है कि हर्बल सिगरेट को लेकर बाजार में जागरूकता की कमी और नियामक ढील चिंता का विषय है। विशेषज्ञों ने साफ कहा कि निकोटीन-फ्री होने का मतलब यह नहीं है कि यह सुरक्षित है।
निष्कर्ष
यह स्टडी साफ संकेत देती है कि हर्बल सिगरेट को सुरक्षित समझना एक बड़ी भूल हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी प्रकार का धूम्रपान शरीर के लिए हानिकारक है।
