अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहा इबोला वायरस एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में शुरू हुआ यह प्रकोप अब इतिहास के तीसरे सबसे बड़े इबोला आउटब्रेक के रूप में देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को “बहुत उच्च” श्रेणी में रखा है। अब तक 600 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 139 लोगों की मौत हो चुकी है।
इबोला को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोरोना काल की तरह फिर से मास्क पहनना जरूरी होगा? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल ऐसी जरूरत नहीं है, क्योंकि इबोला वायरस कोविड-19 की तरह हवा के जरिए नहीं फैलता। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, पसीना, उल्टी, लार या वीर्य के संपर्क में आने से फैलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचना सबसे जरूरी है। संक्रमित मरीज की देखभाल करते समय सुरक्षा किट, दस्ताने और सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा बार-बार हाथ धोना, संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा से बचना और स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का पालन करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
भारत सरकार ने फिलहाल देश में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने न आने की पुष्टि की है। हालांकि एहतियात के तौर पर हाई-रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली में होने वाला भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन भी इसी खतरे को देखते हुए स्थगित कर दिया गया है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इबोला दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। इसकी मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है। गंभीर मामलों में मरीज के शरीर के कई अंग प्रभावित हो जाते हैं और रक्तस्राव, मल्टी-ऑर्गन फेल्योर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय जागरूकता और सावधानी ही इस संक्रमण से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
