उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोकपर्व हरेला प्रकृति, कृषि और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक माना जाता है। सावन के आगमन के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व लोगों को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। नैनीताल में भी हरेला पर्व की तैयारियां और आयोजन पारंपरिक उत्साह के साथ देखने को मिले।
वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि हरेला केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यह पर्व लोगों को पेड़-पौधों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जागरूक करता है।
उन्होंने बताया कि सावन से नौ दिन पहले घरों में मिट्टी की टोकरी में विभिन्न प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। सावन के पहले दिन इन हरे अंकुरों की पूजा कर उन्हें कुलदेवता को अर्पित किया जाता है और परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद स्वरूप दिया जाता है।
डॉ. तिवारी ने कहा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय हालात में हरेला जैसे पर्व समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनने का अवसर देते हैं। यदि हर व्यक्ति इस अवसर पर पौधारोपण करे तो हरियाली बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यह परंपरा केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
