देहरादून: गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद उत्तराखंड का क्षेत्रीय सिनेमा नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पहली बार किसी गढ़वाली फीचर फिल्म को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से प्रदेश के कलाकारों और फिल्म निर्माताओं में उत्साह का माहौल है।
यह फिल्म निर्देशक दिनेश पी. भोंसले की मेहनत और उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है। कहानी प्रसिद्ध लेखक डॉ. नंदकिशोर हटवाल की रचना ‘जमनदास ढोली’ से प्रेरित है।
फिल्म में ढोली समुदाय के जीवन, संघर्ष, सामाजिक स्थिति और उनकी सांस्कृतिक भूमिका को बेहद वास्तविक अंदाज में दिखाया गया है। यही कारण है कि इसकी कहानी राष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों के दिलों तक पहुंचने में सफल रही।
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए मील का पत्थर बताया है। परिषद के अनुसार, राज्य की नई फिल्म नीति का सकारात्मक असर अब दिखाई देने लगा है और कई फिल्म निर्माता उत्तराखंड को शूटिंग के लिए चुन रहे हैं।
‘ढोली’ की सफलता यह साबित करती है कि स्थानीय कहानियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं। यह सम्मान आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
