रुड़की में श्री श्री 1008 महंत पावन दास जी महाराज के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पहली बार शहर पहुंचे महंत जी का फूल-मालाओं और जयकारों के साथ स्वागत किया गया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की सबसे बड़ी पहचान है। इसे सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने धार्मिक आयोजनों को समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
महंत जी ने नेमिशरण्य धाम की महिमा बताते हुए कहा कि यह भगवान विष्णु की तपोभूमि है और सदियों से संतों तथा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने दिसंबर में आयोजित होने वाले श्रीमद्भागवत कथा एवं विराट वैदिक महायज्ञ की जानकारी देते हुए कहा कि देशभर के संत और विद्वान इसमें शामिल होंगे। कथा का प्रसारण आस्था चैनल पर भी किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में महंत जी ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए धार्मिक और सामाजिक एकता बनाए रखने का संदेश दिया।
