उत्तराखंड में ग्राम सभा का सालाना बजट कितना होता है? जानिए पूरी व्यवस्था

उत्तराखंड में किसी भी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत का बजट तयशुदा नहीं होता। यह पंचायत की आबादी, भौगोलिक स्थिति, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर निर्भर करता है। राज्य की पहाड़ी परिस्थितियों के कारण कई पंचायतों को अतिरिक्त फंड भी दिया जाता है।

ग्राम पंचायतों को पैसा कहाँ से मिलता है?

1. 15वें वित्त आयोग की ग्रांट

केंद्र सरकार ग्राम पंचायतों को हर साल दो किस्तों में Untied Grant और Tied Grant जारी करती है।
उत्तराखंड की हजारों ग्राम पंचायतों को औसतन ₹8 लाख से ₹12 लाख तक की वार्षिक राशि मिलती है। यह राशि पंचायत स्तर पर बुनियादी विकास कार्यों के लिए उपयोग की जाती है।

2. राज्य वित्त आयोग का बजट

उत्तराखंड सरकार भी पंचायतों को अलग से बजट जारी करती है। यह राशि पंचायत की जनसंख्या, SC/ST आबादी, भौगोलिक कठिनाई और पिछड़ेपन के आधार पर तय होती है।

  • छोटी पंचायतों को लगभग ₹3–5 लाख
  • मध्यम पंचायतों को ₹10–15 लाख
  • बड़ी पंचायतों को ₹15–25 लाख या उससे अधिक राशि मिल सकती है।

3. सरकारी योजनाओं का फंड

ग्राम पंचायतों को विभिन्न योजनाओं से भी अलग बजट मिलता है, जैसे:

  • मनरेगा (MGNREGA)
  • स्वच्छ भारत मिशन
  • जल जीवन मिशन
  • प्रधानमंत्री आवास योजना
  • 15वां वित्त आयोग फंड

यदि किसी पंचायत में मनरेगा या निर्माण कार्य अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त ₹20 लाख से ₹50 लाख तक की राशि भी आ सकती है।

पंचायत के आकार के अनुसार अनुमानित बजट

पंचायत का प्रकारआबादीअनुमानित वार्षिक बजट
छोटी पंचायत500–1500₹8–15 लाख
मध्यम पंचायत1500–3000₹15–35 lakh
बड़ी पंचायत3000+₹40 लाख से ₹1 करोड़+

पहाड़ी क्षेत्रों को मिलता है अतिरिक्त लाभ

उत्तराखंड के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों की पंचायतों को Performance Grant और Difficult Area Fund के तहत अतिरिक्त सहायता मिलती है।
चकराता, पुरोला, धारचूला जैसे इलाकों की पंचायतों को सामान्य पंचायतों की तुलना में 20–30% अधिक फंड मिलने की संभावना रहती है।

ग्राम प्रधान का मानदेय कितना है?

उत्तराखंड में ग्राम प्रधान को वर्तमान में लगभग ₹3,500 प्रतिमाह यानी ₹42,000 वार्षिक मानदेय दिया जाता है। यह राशि विकास बजट से अलग होती है।

पंचायत का पैसा किन कामों में खर्च होता है?

ग्राम पंचायतों को 29 विषयों पर विकास कार्य करने का अधिकार है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • सड़क और खड़ंजा निर्माण
  • नाली और जल निकासी
  • स्ट्रीट लाइट
  • पेयजल और हैंडपंप
  • कूड़ा प्रबंधन
  • स्वच्छता और ODF रखरखाव
  • सार्वजनिक सुविधाएं

इस फंड का उपयोग सामान्यतः कर्मचारियों की सैलरी पर नहीं किया जा सकता।

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