देहरादून: अपनी अनोखी खुशबू और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध दून बासमती को फिर से नई पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जिला प्रशासन ने खेती बढ़ाने के साथ-साथ बीज संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और ब्रांडिंग की व्यापक योजना तैयार की है।
इस साल 75 हेक्टेयर क्षेत्र में 160 किसान दून बासमती की खेती कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ाई जाएगी। किसानों को तकनीकी सहायता के साथ-साथ बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पिछले वर्ष हुए सफल ट्रायल ने इस अभियान को नई दिशा दी। किसानों से सीधे खरीद की व्यवस्था कर उन्हें ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान किया गया। इससे किसानों का भरोसा मजबूत हुआ और वे दोबारा इस पारंपरिक खेती की ओर लौटे।
विकासनगर में प्रस्तावित सीड बैंक और टेस्टिंग लैब भविष्य में दून बासमती की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। प्रशासन चाहता है कि बाजार में केवल प्रमाणित और शुद्ध दून बासमती ही पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह योजनाबद्ध तरीके से काम जारी रहा तो दून बासमती आने वाले समय में उत्तराखंड के किसानों के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकती है।
