उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक स्थित बाडयू गांव से सामने आया है, जहां घास लेने जंगल गई एक महिला पर गुलदार ने दिनदहाड़े हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
घास लेने गई थी महिला, घात लगाकर बैठा था गुलदार
जानकारी के अनुसार बाडयू गांव निवासी प्रभा देवी, पत्नी मातबर सिंह, रोज की तरह जंगल में घास लेने गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गुलदार उसे घसीटकर पास के एक खंडहरनुमा मकान तक ले गया।
काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान महिला का शव खंडहर के पास बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, वन विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
महिला की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार का आतंक बना हुआ है और कई बार वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ रहे हमलों के बावजूद विभाग केवल आश्वासन देता रहा। लोगों ने मृतका के परिवार को उचित मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा के स्थायी इंतजाम की मांग की।
खतरा बढ़ने पर शूटरों ने मार गिराया गुलदार
घटना के बाद भी गुलदार आसपास के इलाके में घूमता रहा, जिससे अन्य ग्रामीणों पर हमले की आशंका बनी हुई थी। वन विभाग की टीम और शूटरों को मौके पर तैनात किया गया।
बताया गया कि पहले गुलदार को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने का प्रयास किया गया, लेकिन परिस्थितियां लगातार जोखिमपूर्ण होती जा रही थीं। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए शूटरों ने आत्मरक्षा और जनसुरक्षा के तहत गुलदार को मार गिराया।
पहाड़ में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि पौड़ी जनपद के कई गांव पिछले कुछ वर्षों से गुलदार के हमलों की चपेट में हैं। आए दिन मवेशियों और लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे ग्रामीण भय के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं।
पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग और सरकार ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो पहाड़ के गांवों से पलायन की रफ्तार और तेज हो सकती है।
प्रशासन ने दिए जांच और सहायता के निर्देश
वन विभाग के अधिकारियों ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है। मृतका के परिजनों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और वन्यजीव गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
