उत्तराखंड के शिक्षा हब माने जाने वाले रुड़की में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयानों को लेकर छात्रों ने शनिवार को एक जुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया। छात्रों का कहना है कि जब बड़े नेता सार्वजनिक मंचों से परीक्षाओं के सही नाम तक नहीं ले पाते, तो यह उनकी लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय कोचिंग संस्थानों से जुड़े अभ्यर्थियों ने बताया कि NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए वे साल-दर-साल कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक या प्रशासनिक गड़बड़ी की खबरें आती हैं, तो उनका मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों का इस विषय पर हल्का रवैया छात्रों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
छात्र संघ प्रतिनिधियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। यदि किसी परीक्षा एजेंसी से बार-बार गलतियाँ हो रही हैं, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मंत्री और नेताओं को बयानबाज़ी करने के बजाय व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
रुड़की के प्रमुख शिक्षाविदों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म होने से देश की शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अगर योग्य और मेहनती बच्चों को समय पर न्याय नहीं मिला, तो युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।
प्रदर्शनकारी युवाओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को हर स्तर पर लड़ेंगे। उन्होंने मांग की है कि NEET परीक्षा से जुड़ी तमाम अनियमितताओं की सीबीआई या न्यायिक निगरानी में जांच हो और दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बन सके।
