हंतावायरस से राहत की उम्मीद: जल्द आ सकती है दुनिया की पहली वैक्सीन, वैज्ञानिकों को मिले सकारात्मक नतीजे

हाल के दिनों में हंतावायरस संक्रमण ने दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर क्रूज शिप MV Hondius पर संक्रमण फैलने और तीन लोगों की मौत की खबरों के बाद इस वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी बीच राहत देने वाली खबर सामने आई है। वैज्ञानिक अब हंतावायरस से बचाव के लिए पहली वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं और शुरुआती परीक्षणों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

क्या है हंतावायरस?

Hantavirus एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरस समूह है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के संपर्क से इंसानों में फैलता है। संक्रमित चूहों की लार, मूत्र या मल के सूखकर हवा में मिल जाने पर यह वायरस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पुराने बंद कमरे, गोदाम, लकड़ी के ढेर और गंदे स्टोर रूम संक्रमण के बड़े स्रोत बन सकते हैं।

क्यों बढ़ी चिंता?

हाल ही में लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आए, जिसके बाद कई यात्रियों और क्रू में संक्रमण की आशंका जताई गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संक्रमण से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से हवा में फैलने वाला नहीं है, लेकिन इसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। गंभीर मामलों में संक्रमण “हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम” का रूप ले लेता है, जिसमें मरीज के फेफड़े और किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

वैक्सीन पर तेजी से काम

Moderna समेत कई वैज्ञानिक संस्थान हंतावायरस के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड की University of Bath के वैज्ञानिकों ने हंतीन डिजीज के खिलाफ एक नया एंटीजन विकसित किया है, जो हंतावायरस समूह से जुड़ी बीमारी है।

इस वैक्सीन का लैब और जानवरों पर परीक्षण किया गया, जिसमें अच्छे परिणाम सामने आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती नतीजों में शरीर में मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स देखने को मिला है।

अभी बाकी हैं क्लिनिकल ट्रायल

विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन को आम लोगों के इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने से पहले कई चरणों के क्लिनिकल ट्रायल होने बाकी हैं। इसके बावजूद शुरुआती सफलता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रोफेसर एसेल सार्टबाएवा ने कहा कि अगर हंतावायरस की प्रभावी वैक्सीन तैयार हो जाती है, तो इससे संक्रमण को फैलने से रोकने और मौतों को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

कई और टीके भी विकास के चरण में

United States Army Medical Research Institute of Infectious Diseases के वैज्ञानिक भी एंडीज वायरस के खिलाफ डीएनए वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। शुरुआती फेज-1 ट्रायल्स में इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार परीक्षण में शामिल 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों में वायरस को निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी विकसित हुईं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले और शोध तथा प्रमाणिकता की जरूरत होगी।

हंतावायरस के लक्षणों को हल्के में न लें

डॉक्टरों के मुताबिक हंतावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू या कोविड जैसे लग सकते हैं। इसमें बुखार, शरीर दर्द, थकान, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत शामिल हो सकती है।

समस्या तब बढ़ती है जब लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और संक्रमण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर या आसपास चूहों की मौजूदगी को हल्के में न लें। बंद कमरों, गोदामों या लंबे समय से बंद पड़े स्थानों की सफाई करते समय मास्क और दस्ताने का इस्तेमाल करना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैक्सीन सफल रहती है, तो भविष्य में हंतावायरस जैसी गंभीर बीमारी से बचाव आसान हो सकेगा।

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