देहरादून: उत्तराखंड में बच्चों और किशोरों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंतित कर दिया है। इसी क्रम में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई गंभीर मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हाल ही में सामने आए मामलों को बेहद चिंताजनक बताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
हालिया घटनाओं में विकासनगर में 12 वर्षीय बालक के साथ मारपीट कर उसका हाथ तोड़ने, हरिद्वार में एक मासूम बालिका के अपहरण और टिहरी में प्रेम संबंध के चलते एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या जैसे मामले शामिल हैं।
डॉ. खन्ना ने इन घटनाओं को न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बताया, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और गिरते नैतिक मूल्यों का संकेत भी माना। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसी दिशा में आयोग ने 18 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें पुलिस, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, श्रम और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे मामलों की निगरानी लगातार की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी।
