आज के समय में तेजी से बढ़ती बीमारियों में कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस बीमारी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। शोध के अनुसार, आंतों में बनने वाले दो खास प्रकार के पॉलीप्स (गांठें) कैंसर के खतरे को 5 गुना तक बढ़ा सकते हैं।
क्या होते हैं पॉलीप्स?
पॉलीप्स आंत की अंदरूनी परत पर बनने वाली छोटी-छोटी गांठें होती हैं। शुरुआत में ये हानिकारक नहीं लगतीं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर रूप ले सकती हैं। अधिकांश मामलों में आंत का कैंसर इन्हीं पॉलीप्स से विकसित होता है, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
ये दो पॉलीप्स सबसे ज्यादा खतरनाक
शोध में दो प्रकार के पॉलीप्स को सबसे ज्यादा जोखिम भरा बताया गया है:
- एडेनोमा (Adenoma)
यह सबसे आम प्रकार का पॉलीप है
समय के साथ कैंसर में बदल सकता है - सेरेटेड (Serrated Polyps)
यह थोड़ा अलग संरचना वाला पॉलीप होता है
अक्सर देर से पता चलता है
कैंसर बनने की संभावना अधिक रहती है
जब ये दोनों पॉलीप्स एक साथ पाए जाते हैं, तो कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
यह महत्वपूर्ण अध्ययन Flinders University और Flinders Medical Centre के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया।
शोध के मुख्य निष्कर्ष:
8,400 से अधिक कोलोनोस्कोपी रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया
जिन मरीजों में सेरेटेड पॉलीप्स थे, उनमें से लगभग आधों में एडेनोमा भी पाया गया
दोनों पॉलीप्स का एक साथ होना “हाई-रिस्क कॉम्बिनेशन” है इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित किया गया है।
क्यों खतरनाक है यह बीमारी?
आंत का कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण साफ नहीं दिखते।
संभावित लक्षण:
पेट दर्द या असहजता
बार-बार कब्ज या दस्त
मल में खून
अचानक वजन कम होना
कई बार यह बिना लक्षण के भी बढ़ता रहता है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है। बचाव ही सबसे बड़ा उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है समय पर जांच और निगरानी।
बचाव के तरीके:
नियमित कोलोनोस्कोपी करवाएं
फाइबर युक्त आहार लें
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड कम करें
नियमित व्यायाम करें
धूम्रपान और शराब से बचें
यह नई रिसर्च इस बात को और स्पष्ट करती है कि आंत के कैंसर का खतरा अचानक नहीं बढ़ता, बल्कि यह धीरे-धीरे पॉलीप्स के जरिए विकसित होता है। अगर समय रहते इन गांठों की पहचान कर ली जाए, तो कैंसर के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए नियमित जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है।
