निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज

विकासनगर: निजी अस्पतालों में इलाज के खर्च और चिकित्सा प्रक्रियाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जन संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि कई अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों को उपचार संबंधी पूरी जानकारी दिए बिना बड़े फैसले लेने के लिए प्रेरित करते हैं।

मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। मरीजों को उनके रोग, उपचार विकल्प, संभावित खर्च और जोखिमों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई शिकायतों में यह सामने आया है कि मरीजों को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती।

संगठन ने मांग की है कि निजी अस्पतालों में उपचार से पहले अनुमानित खर्च की लिखित जानकारी देना अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा बड़े ऑपरेशन या जटिल उपचार के मामलों में मरीजों को स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय लेने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।

जन संघर्ष मोर्चा ने कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो आम जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है। संगठन ने सरकार से अस्पतालों की नियमित ऑडिट और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।

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